Property Purchasing Rules:जब कोई व्यक्ति अपनी जिंदगी भर की कमाई से एक घर या जमीन खरीदता है, तो वह पल उसके लिए बेहद खास होता है। लेकिन अगर थोड़ी सी लापरवाही से वह प्रॉपर्टी कानूनी विवाद में फंस जाए, तो सारी मेहनत पर पानी फिर सकता है। आमतौर पर लोगों को लगता है कि रजिस्ट्री होने के बाद वह प्रॉपर्टी के मालिक बन गए हैं, लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। रजिस्ट्री के अलावा एक और जरूरी प्रक्रिया है – म्यूटेशन, जिसे पूरा करना बेहद जरूरी है।
क्या रजिस्ट्री के बाद आप प्रॉपर्टी के मालिक बन जाते हैं?
रजिस्ट्री एक कानूनी दस्तावेज़ होता है जो यह साबित करता है कि आपने किसी प्रॉपर्टी को खरीदा है। लेकिन सिर्फ रजिस्ट्री से आप सरकारी रिकॉर्ड में मालिक नहीं माने जाते। प्रॉपर्टी का असली मालिक वही माना जाता है जिसके नाम पर राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Record) में एंट्री होती है, और यह काम म्यूटेशन प्रक्रिया से होता है।
म्यूटेशन क्या होता है?
म्यूटेशन (Mutation) का मतलब होता है किसी जमीन या संपत्ति के सरकारी रिकॉर्ड को पुराने मालिक से हटाकर नए मालिक के नाम करना। यह प्रक्रिया स्थानीय राजस्व विभाग, नगर निगम या संबंधित प्राधिकरण के माध्यम से होती है।
इस प्रक्रिया के बाद ही आप सरकारी रिकॉर्ड में उस संपत्ति के मालिक कहलाते हैं और टैक्स, बिजली, पानी जैसे बिल आपके नाम पर आने लगते हैं।
रजिस्ट्री और म्यूटेशन में क्या फर्क है?
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रजिस्ट्री (Sale Deed): यह एक कानूनी कागज होता है जो दिखाता है कि आपने संपत्ति खरीदी है। इसमें खरीददार, विक्रेता, कीमत और तारीख की जानकारी होती है।
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म्यूटेशन: यह स्थानीय सरकारी रिकॉर्ड में आपके नाम को दर्ज करने की प्रक्रिया है। जब तक यह नहीं होता, आप सिर्फ खरीदार हैं – मालिक नहीं।
कौन-कौन सी प्रॉपर्टी के लिए कैसी म्यूटेशन प्रक्रिया होती है?
भारत में प्रॉपर्टी मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं और उनकी म्यूटेशन प्रक्रिया भी अलग होती है:
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खेती की जमीन (Agricultural Land): इसके लिए पटवारी या हल्का कर्मचारी से संपर्क करना होता है।
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रिहायशी प्रॉपर्टी (Residential Land): इसके लिए नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद में आवेदन देना होता है।
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औद्योगिक प्रॉपर्टी (Industrial Land): यह प्रक्रिया संबंधित जिले की इंडस्ट्रियल अथॉरिटी या विकास प्राधिकरण से होती है।
म्यूटेशन कराने के लिए जरूरी दस्तावेज
म्यूटेशन के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की जरूरत होती है:
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रजिस्ट्री की कॉपी
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आधार कार्ड या पहचान पत्र
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पासपोर्ट साइज फोटो
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पिछला प्रॉपर्टी टैक्स रसीद (यदि उपलब्ध हो)
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म्यूटेशन आवेदन पत्र
कुछ राज्यों में अब यह प्रक्रिया ऑनलाइन भी उपलब्ध है, जिससे आवेदन करना और आसान हो गया है।
म्यूटेशन न कराने के नुकसान
अगर आप रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन नहीं कराते हैं, तो आपको कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:
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प्रॉपर्टी पर किसी और का दावा हो सकता है
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सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम नहीं होगा
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बिजली, पानी और टैक्स जैसी सेवाओं में दिक्कत होगी
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प्रॉपर्टी बेचने या लोन लेने में परेशानी आएगी
ध्यान रखने योग्य बातें
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प्रॉपर्टी खरीदने से पहले पुराने रिकॉर्ड की जांच जरूर करें
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विक्रेता से क्लियर टाइटल और वैध दस्तावेज लें
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रजिस्ट्री के तुरंत बाद म्यूटेशन कराएं
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फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सभी दस्तावेजों की वैधता जरूर जांचें
प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के साथ-साथ म्यूटेशन कराना बेहद जरूरी है। बिना म्यूटेशन के आप सिर्फ कागज़ों में खरीदार कहलाएंगे, लेकिन असली मालिकाना हक नहीं मिलेगा। इसलिए अगर आप भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद से बचना चाहते हैं, तो रजिस्ट्री के तुरंत बाद म्यूटेशन की प्रक्रिया जरूर पूरी करें।